खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों को मिलेगा डिजिटल प्‍लेटफॉर्म, ऑनलाइन होगी खरीददारी

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खादी के कपड़ों की दीवानी आज की युवा पीढ़ी भी है। लोगों की पसंद को ध्‍यान में रखते हुए खादी ग्रामोद्योग ने भी अपने प्रोडक्‍ट्स और कलेक्‍शन में समय के साथ कई बदलाव किए हैं। 



नई दिल्‍ली, 12 जुलाई (हि.स.)। देश की सांस्‍कृतिक धरोहर को संजोए खादी और ग्रामोद्योग जिसकी शुरुआत ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को पुनर्जीवित करने के लिए महात्‍मा गांधी ने किया था। उस खादी के उत्‍पादों की बिक्री  के लिए मोदी सरकार अमेजन और अलीबाबा जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की तरह एक बड़ी वेबसाइट शुरू करने की योजना बना रही है। दरअसल सरकार की मंशा इस वेबसाइट के जरिए खादी और ग्रामोद्योग के उत्‍पादित कपड़ों और सामान (प्रोडक्‍ट्स)  वैश्‍विक स्‍तर पर ऑनलाइन बेचने की है।

 खादी के कपड़ों की दीवानी आज की युवा पीढ़ी भी है। लोगों की पसंद को ध्‍यान में रखते हुए खादी ग्रामोद्योग ने भी अपने प्रोडक्‍ट्स और कलेक्‍शन में समय के साथ कई बदलाव किए हैं। इसकी बानगी हाल ही में लोकसभा के बजट सत्र में देखने को मिली। जहां एक सवाल के जवाब में केंद्रीय सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्योग (एमएसएमई)  मंत्री नितिन गडकरी ने खादी को ऑनलाइन प्रमोट करने की जानकारी संसद को दी। गडकरी ने कहा कि सरकार एमएसएमई खादी ग्रामोद्योग के लिए अमेजॉन तथा अलीबाबा की तर्ज पर एक बड़ी बेबसाइट शुरू करने जा रही है, जिसमें इस क्षेत्र के लोग अपने उत्‍पाद बेच सकेंगे। उन्‍होंने कहा कि इसका फायदा इससे जुड़े लोगों को होगा, क्‍योंकि उनके उत्‍पाद को दूसरे देशों के खरीददार भी खरीद सकेंगे। गडकरी ने कहा कि अभी एमएसएमई क्षेत्र का देश के जीडीपी में योगदान 29 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्‍य है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में अगले पांच साल में रोजगार की संख्‍या 11 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है।

दरअसल, गांधीजी ने खादी और ग्रामोद्योग की शुरुआत भारतीय स्‍वाधीनता संग्राम के एक अभिन्‍न हिस्‍से के तौर पर की थी। पहले अखिल भारतीय बुनकर संघ की स्‍थापना 1925 और उसके बाद वर्ष 1934 में अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ की आधारशिला रखी गई थी। आजादी के बाद खादी और ग्रामोद्योग के माध्‍यम से भारत की ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत और विकसित करने के लिए देश की पहली पंचवर्षीय योजना में इसके लिए प्रावधान भी किए गए। इसके बाद 1953 में वाणिज्य मंत्रालय के अधीन अखिल भारतीय खादी और ग्रामोद्योग  मंडल की स्‍थापना की गई।

 इसके बाद देश की अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत और गतिशील बनाने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग को संसद के एक अधिनियम (साल 1956 के 61वें तथा साल 1987 के अधिनियम क्रमांक 12 तथा  2006 के अधिनियम क्रमांक 10 ) के जरिये एक विधिवत संगठन है। फिलहाल यह संगठन सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रलाय के अधीन कार्यरत है।

खादी को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कई बार लोगों से खादी फॉर नेशन,  खादी फॉर फैशन और खादी फॉर ट्रांस्‍फॉरमेशन का आह्वान करते हुए खादी वस्‍त्र एवं उत्‍पादों का प्रयोग करने की अपील की है। खादी के ब्रांड अंबेसेडर के रूप में प्रधानमंत्री ने खादी को वैश्‍विक स्‍वरुप प्रदान किया है। परिणामस्‍वरुप पिछले 5 साल में खादी की बिक्री में 125 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खादी ने अपने उत्‍पादों में समय के साथ कई बदलाव किए हैं, जिसमें डेनिम जींस, स्‍कर्ट, जैकेट और बच्‍चों और महिलाओं के लिए डिजाइनर प्रोडक्‍ट्स भी शामिल है।

 


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