हिंसा को अलग-अलग दृष्टि से देखना गलत, एक होकर इसका विरोध जरूरी : प्रधानमंत्री

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‘मॉब लिंचिंग’ पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री का वक्तव्य



नई दिल्ली, 26 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झारखंड में हुई ‘मॉब लिंचिंग’ के मुद्दे पर बुधवार को राज्यसभा में कहा कि युवक की हत्या का दुख उन्हें भी है और इसके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हालांकि इन घटनाओं को अलग-अलग दृष्टि से देखना गलत है और हिंसा झारखंड में हो, पश्चिम बंगाल में या फिर केरल में, दोषियों को कड़ी सजा होनी चाहिए।

राष्ट्रपति के अभिभाषण से जुड़े धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनियाभर में आतंक ने ज्यादा नुकसान किया है। उसके पीछे इसे ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ रूप में देखा जाना और ‘मेरा आतंक’ तथा ‘तेरा आतंक’ है। हिंसा की घटनाओं को एक ही मानदंड से देखा जाना चाहिए तभी हिंसा पर रोक लगेगी। तभी हिंसा करने वालों को लगेगा कि एक मुद्दे पर पूरा देश एक है। उन्होंने कहा कि सदन में झारखंड को ‘मॉब लिंचिंग’ का अड्डा बताया गया। पूरे राज्य को बदनाम करना सही नहीं है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बिहार में फैले चमकी बुखार पर भी टिप्पणी की और कहा कि यह हमारी पिछले 7 दशक की बड़ी विफलताओं में से एक है। यह हमारे लिए शर्म और दु:ख की बात है। उन्होंने कहा कि पोषण, टीकाकरण, सुरक्षित मातृत्व और आयुष्मान भारत योजना का हम जितना ज्यादा प्रचार करेंगे उतना ही ऐसे संकटों से हम बच पाएंगे।

चुनाव के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने विपक्ष को सकारात्मक सोच अपनाने और परिणाम स्वीकारने की सलाह दी।  उन्होंने कहा कि 1977 से 2019 तक ईवीएम संसद से लेकर न्यायपालिका तक हर कसौटी पर खरी उतरी है। ईवीएम से अब तक 113 विधानसभा और 4 लोक सभा चुनाव हुए हैं और इस दौरान विभिन्न दलों को सत्ता में आने का मौका मिला है लेकिन अब कुछ दल चुनाव हार गए तो रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सदस्य कभी सदन में दो की संख्या में रह गए थे और पार्टी का मजाक बनाया जाता था लेकिन कार्यकर्ताओं, विचारों और देश की जनता पर भरोसे ने पार्टी को फिर से खड़ा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष को ‘एक देश-एक चुनाव’ के मुद्दे पर चर्चा के लिए आगे आना चाहिए। चुनाव सुधार की चर्चा खुले मन से होनी चाहिए। ओडिशा के मतदाताओं ने लोकसभा के लिए एक मतदान किया और विधानसभा के लिए दूसरा मतदान किया। देश का मतदाता एक ही समय विवेक और बुद्धि से अलग-अलग सरकार चुन सकते हैं।

नए और पुराने इंडिया के मुद्दे पर कांग्रेस को फटकार लगाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी को ‘पुराना इंडिया’ वापस चाहिए। उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए कहा कि पुराना इंडिया जहां पत्रकार वार्ता में कैबिनेट के निर्णय को फाड़ दिया जाए, जहां नौसेना को सैर-सपाटे के लिए इस्तेमाल किया जाए, जहां जल, थल, नभ हर जगह घोटाले हों, लेकिन देश की जनता हिन्दुस्तान को पुराने दौर में ले जाने के लिए कतई तैयार नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काफी समय के बाद देश ने एक स्थिर सरकार को दोबारा चुना है और अब यह देशभर में ट्रेंड बन गया है, जो राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। देश की जनता अब स्थिरता चाहती है। उन्होंने भाजपा की जीत को देश की हार बताने के विपक्ष के बयान को दुखद बताया और कहा कि जनता के विवेक पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी को लगता है कि देश कांग्रेस है और कांग्रेस देश है जबकि ऐसा नहीं है। हमें देश की चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार कामकाज को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है ताकि देश के लोगों को इसका लाभ मिल सके।


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