गोरखपुर, 26 जून (हि.स.)। इन्वेटर्स समिट में उद्योग स्थापित करने की मंशा जाहिर करने वाले 11 उद्यमियों को जमीन नहीं मिल रही है। यह स्थिति सरकार की अगंभीरता को उजागर करने वाला साबित हो रहा है। जिला प्रशासन अब जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश देने का दावा कर रहा है। जिला प्रशासन का यह रवैया न तो उद्यमियों में हित में है और न ही सरकार की साख में लिए ही अच्छा माना जा रहा है।
इधर, रोजगार के लिए भटक रहे नौजवानों को भी भारी आघात लगाने वाली खबर है। इधर, 06 उद्यमियों ने आर्थिक व अन्य कारणों का हवाला देकर उद्योग स्थापित करने से मना कर दिया है। प्रदेश में सरकार बनते ही योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन्वेस्टर्स सम्मिट कराया था। इसमें शामिल होने वाले उद्योगपतियों ने एमओयू पर हस्तरक्षर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में उद्योग स्थापित करने की मंशा जाहिर थी। कुछ खास शर्तों के साथ हुए इस एमओयू हस्ताक्षर के बाद प्रदेश के लोगों में उत्साह का संचार हुआ था और हर वर्ग को यह उम्मीद हो गयी थी कि उदयोगों के स्थापित होने से उनके दिन बहुरेंगे। नौजवानों को रोजगार में लिए बाहर का रुख नहीं करना होगा और उन्हें अपने प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्योगों में रोजगार मिल जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में भी उद्योग स्थापित करने के लिए 32 एमओयू हस्ताक्षरित हुए थे। इससे लगाने लगा था का पूर्वांचल के यह इलाका अब रोजगार देने में आगे होगा, लेकिन अब यह नाउम्मीदी में बदल रहा है। हालात है कि इनमें से अभी महज 08 इकाइयां ही कार्यरत हुई हैं और 07 इकाइयों के कार्य प्रगति पर है। अभी इनका निर्माण चल रहा है और उम्मीद है कि जल्दी ही चालू हालत में आ जाएंगी। बावजूद इसके आंकड़े बताते हैं कि यह प्रयास उम्मीद से काफी कम है। 32 इकाइयों में से महज 15 पर उम्मीद टिकी है। यह आंकड़ा लक्ष्य का महज 47 प्रतिशत है। जबकि स्थापित होने वाले शेष 53 प्रतिशत उद्योगों का भविष्य गार्टमे है। वजह, आंकड़े बता रहे हैं कि 11 इकाइयों को अभी जमीन नहीं मिल पाई है। इन्हें स्थापित करने के लिए 34 एकड़ जमीन की जरूरत है और सरकारी वादे में मुताबिक सरकार को ही यह जमीन उपलब्ध करानी है। इतना ही नहीं, 06 इकाइयों के उद्योगपतियों ने आर्थिक व अन्य कारणों को बता कर गोरखपुर में उद्योग स्थापित करने से मना कर दिया है।
