गुजरात में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह 57 सालों से दिल्ली हाईकोर्ट और बांबे हाईकोर्ट के फैसलों के तहत चुनाव कराता आया है। आयोग कैजुअल रिक्तियों के लिए अलग-अलग चुनाव कराता है।



नई दिल्ली, 25 जून (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव कराने के खिलाफ कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप चुनाव के बाद हाईकोर्ट में चुनौती दें।
इस मामले में निर्वाचन आयोग ने हलफनामा दाखिल कर दो सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराने के अपने फैसले को सही ठहराया। निर्वाचन आयोग ने कहा कि अमित शाह और स्मृति ईरानी द्वारा खाली की गई सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराना कानूनन सही है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह 57 सालों से दिल्ली हाईकोर्ट और बांबे हाईकोर्ट के फैसलों के तहत चुनाव कराता आया है। आयोग कैजुअल रिक्तियों के लिए अलग-अलग चुनाव कराता है। जब किसी की राज्यसभा सदस्यता का कार्यकाल खत्म होता है तो वह रेगुलर वेकेंसी होती है। निर्वाचन आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के सत्यपाल मलिक मामले के फैसले का हवाला दिया जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि कैजुअल वैकेंसी को अलग-अलग चुनाव से भरा जाएगा।
पिछले 19 जून को सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था। याचिका गुजरात के कांग्रेस विधायक परेश भाई धनानी ने दायर की थी। अमित शाह और स्मृति ईरानी के लोकसभा सदस्य बनने से खाली हुई इन सीटों पर 5 जुलाई को अलग-अलग चुनाव होने हैं।
निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के मुताबिक अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाणपत्र 23 मई को मिला था, जबकि स्मृति इरानी को 24 मई को मिला। इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया। इसी को आधार बनाते हुए निर्वाचन आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन चुनाव एक ही दिन होंगे। ऐसा होने से गुजरात की दोनों सीटों पर बीजेपी को जीत मिल जाएगी। क्योंकि, वहां प्रथम वरीयता वोट नए सिरे से तय होंगे। एक साथ चुनाव होते तो कांग्रेस को एक सीट मिल जाती। संख्या बल के हिसाब से गुजरात में राज्यसभा का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को 61 वोट चाहिए।

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