“ईरान को झुकाना चाहता है अमेरिका”

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दोनों देशों का कहना है कि वे युद्ध नहीं चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो यह भी कहा है कि वे ईरान के साथ वार्ता करना चाहते हैं।



वाशिंगटन, 24 जून (हि.स.)। अमेरिका सोमवार से ईरान पर प्रतिबंधों का शिकंजा और कसने जा रहा है। लेकिन परमाणु समझौता से वाशिंगटन के अलग होने के बाद बनी तनावपूर्ण स्थिति में भी दोनों देशों के बीच कंटीले तारों का कारोबार हुआ है।
विदित हो कि दोनों देशों का कहना है कि वे युद्ध नहीं चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो यह भी कहा है कि वे ईरान के साथ वार्ता करना चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर तेहरान परमाणु कार्यक्रम को छोड़ दे तो वाशिंगटन उसका सबसे बड़ा दोस्त बन जाएगा और यह इस्लामिक गणराज्य समृद्ध देश बन जाएगा। फिर भी, कई घटनाओं जैसे खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले और अमेरिकी ड्रोन मार गिराने से दोनों देशों के बीच संघर्ष की आशंका पैदा हो गई है।
इन घटनाओं के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान पर नियोजित जवाबी कार्रवाई की संभावनाओं को खारिज कर दिया था। लेकिन अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान समेत सभी दुश्मन देशों को चेतावनी दी थी कि वे अमेरिका की क्षमता कमतर कर नहीं आंकें। इन सबके बावजूद ईरान की अकड़ कम नहीं हुई हैऔर अमेरिकी ड्रोन मार गिराने के बाद ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ को गर्व हो रहा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि ड्रोन ईरानी वायु क्षेत्र का उल्लंघन कर रहा था। साथ ही उन्होंने पूरी शक्ति से अमेरिका को जवाब देने की बात कही है।
स्थिति के मद्देनजर दोनों देशों के बीच सुलह के आसार नहीं दिख रहे हैं। इस बीच बताया जाता है कि अमेरिका ने ड्रोन को मार गिराने के जवाब में  ईरानी मिसाइल प्रणाली को कुंद करने के लिए साइबर हमला किया है। इस साइबर हमले से ईरान के कंप्यूटर पंगू बन जाएंगे जिससे खाड़ी में जहाजों का पीछा करने की ईरानी क्षमता समाप्त हो जाएगी और साथ ही मिसाइल लांचर भी दिशाहीन हो जाएंगे। लेकिन तेहरान का कहना है कि वह अपनी खाल बचाने के लिए इस तरह का दावा कर रहा है। ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
ईरान के साथ बढ़ती तल्खी के मद्देनजर अमेरिकी विदेश मंत्री सोमवार को खाड़ी में मित्र देशों के दौरे पर हैं। ये देश भी ईरान से त्रस्त हैं जो युद्ध की स्थिति में अमेरिका के साथ रहेंगे।
उधर, यमन में सउदी नीत गठबंधन सेना ने आरोप लगाया है कि ईरान हूती विद्रोहियों के साथ है जिसने सोमवार को दक्षिणी सउदी अरब में नागरिक हवाई अड्‌डे पर हमले किए हैं। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और सात अन्य घायल हो गए हैं।
दरअसल, रियाद अकसर यह आरोप लगाता रहा है कि ईरान हूती विद्रोहियों को अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराता है जो सउदी अरब में प्रतिष्ठानों पर हमले करता रहा है। इस तरह खाड़ी में पहले से ही स्थिति तनावपूर्ण है और अगर अमेरिका ने संयम छोड़ दिया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है।

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