सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बड़े क्षेत्र में फैले कान्हा के बारहसिंगा.

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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हालांकि बारहसिंगा फैल गए हैं, लेकिन रिजर्व के कर्मचारी उन पर लगातार निगाह रख रहे हैं।



होशंगाबाद, 14 जून (हि.स.)। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हॉर्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा को फिर से बसाने की वन्य प्राणी संरक्षण विभाग की कोशिशें रंग ला रही हैं। खुले जंगल में छोड़े जाने के बाद अब ये बारहसिंगा टाइगर रिजर्व के बड़े क्षेत्र में फैल गए हैं।
कान्हा नेशनल पार्क में पाए जाने वाले हॉर्ड ग्राउंड प्रजाति के बारहसिंगा के संरक्षण की दृष्टि से उन्हें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में फिर से आबाद करने की योजना वन्य प्राणी संरक्षण विभाग ने बनाई थी। इसके तहत कान्हा से लाए गए बारहसिंगा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पहले विशेष तौर पर बनाए गए बाड़े में रखा गया, बाद में उन्हें कई किश्तों में खुले जंगल में छोड़ा गया। टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार अब तक 51 बारहसिंगा को खुले जंगल में छोड़ा जा चुका है।
दूर-दूर तक फैले
एसटीआर के फील्ड डायरेक्टर एस.के.सिंह ने बताया कि टाइगर रिजर्व में दो स्थानों से कान्हा से लाए गए बारहसिंगा को खुले जंगल में छोड़ा गया था। इसमें बोरी क्षेत्र में 26 बारहसिंगा को छोड़ा गया था, जबकि धांई क्षेत्र में 25 बारहसिंगा को छोड़ा गया था। बोरी क्षेत्र में छोड़े गए बारहसिंगा करीब 400 हैक्टेयर क्षेत्र में फैले घास के मैदान में विचरण कर रहे हैं। लेकिन धांई क्षेत्र में छोड़े गए बारहसिंगा टाइगर रिजर्व के बड़े क्षेत्र में और काफी अंदर तक फैल गए हैं।
निगरानी कर रहे वनकर्मी
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हालांकि बारहसिंगा फैल गए हैं, लेकिन रिजर्व के कर्मचारी उन पर लगातार निगाह रख रहे हैं। फील्ड डायरेक्टर एस.के.सिंह का कहना है कि जंगल में छोड़े गए बारहसिंगा स्वस्थ हैं। छोड़े जाने के बाद अब तक एक ही बारहसिंगा की मौत हुई है, जो एक तेंदुए का शिकार बन गया था। उन्होंने बताया कि तेज गर्मी में भी रिजर्व क्षेत्र के अंदर स्थित छोटे-छोटे तालाबों और नदी-नालों में स्थित कुंड में बारहसिंगा के लिए पर्याप्त पानी मौजूद है।

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