जारी है डॉक्टरों का आंदोलन, प. बंगाल में सामान्य नहीं हुई स्वास्थ्य सेवा

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शुक्रवार सुबह 10 बजे जो हालात हैं उसके मुताबिक अस्पताल के दोनों प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। अंदर आने-जाने वाले हर एक शख्स का पहचान पत्र देखा जा रहा है।



कोलकाता, 14 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के नीलरतन सरकार(एनआरएस) अस्पताल में चिकित्सकों पर हमले की घटना के 90 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन इसके खिलाफ चिकित्सकों का आंदोलन अब भी जारी है। शुक्रवार सुबह इस अस्पताल का आपातकालीन विभाग तो खुल गया लेकिन आउटडोर बंद रहा। इमरजेंसी में चुनिंदा डॉक्टर-नर्स हैं और जिस किसी भी रोगी को इलाज के लिए अंदर जाने दिया जा रहा है उसकी पहचान पूरी तरह से सुनिश्चित करने के बाद ही अंदर घुसने की अनुमति दी जा रही है।
शुक्रवार सुबह 10 बजे जो हालात हैं उसके मुताबिक अस्पताल के दोनों प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। अंदर आने-जाने वाले हर एक शख्स का पहचान पत्र देखा जा रहा है।
दरअसल गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि आंदोलन करने वाले लोग बाहरी हैं, इसलिए पुलिस किसी भी ऐसे शख्स को अस्पताल के अंदर घुसने नहीं दे रही जिस पर थोड़ा भी संदेह हो। रोगियों के साथ आने वाले परिजनों को भी कम संख्या में अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। इमरजेंसी में काफी गंभीर हालत में बीमार मरीजों को ही देखा जा रहा है। इसके अलावा पैथोलॉजी, एक्सरे और अन्य चिकित्सा परिसेवा अब भी सामान्य नहीं हुई है।
इधर, अस्पताल में आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने साफ किया है कि उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। करीब 200 की संख्या में जूनियर डॉक्टर पहले से ही आंदोलनरत थे। अब उनका साथ अस्पताल की नर्सें भी दे रही हैं। इसलिए स्वास्थ्य सेवा और प्रभावित हुई है। भले ही आपातकालीन सेवा शुरू हो गई है लेकिन रोगियों को देखने के लिए नर्सों की संख्या कम है। चिकित्सक भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। इसके अलावा गुरुवार की रात अस्पताल के अधीक्षक और अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था। इसलिए कौन सा विभाग खुला है और कौन सा काम नहीं कर रहा, यह देखने के लिए भी संबंधित अधिकारी फिलहाल मौजूद नहीं हैं।
दूसरी ओर, इधर एनआरएस के अलावा एसएसकेएम, आरजीकर मेडिकल कॉलेज समेत राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में अब भी स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं।
एसएसकेएम की हालत-
गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसएसकेएम अस्पताल में गई थीं और चिकित्सकों को चेतावनी दी थी। हालांकि उसका कोई असर नहीं हुआ। शुक्रवार को यहां भी स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य नहीं हैं। इमरजेंसी विभाग खुला है जहां वरिष्ठ डॉक्टर रोगियों को देख रहे हैं लेकिन जूनियर डॉक्टर काम पर नहीं लौटे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती रोगी के परिजन ने बताया कि छह तारीख से लेकर 13 तारीख तक केवल सलाइन चढ़ाया गया है और शुक्रवार सुबह से वह भी बंद कर दिया गया। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह अस्पताल में रोगियों के इलाज में लापरवाही बरती जा रही है।
आरजीकर के हालात-
कोलकाता के एक और महत्वपूर्ण सरकारी अस्पताल आरजीकर में भी हालात सुधरे नहीं हैं। शुक्रवार को गंभीर हालत वाले रोगियों को अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। आउटडोर यहां भी बंद है और जूनियर डॉक्टरों ने आंदोलन जारी रखा है। इसके अलावा बर्दवान मेडिकल कॉलेज, मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज, बांकुड़ा जिला अस्पताल, उत्तर 24 परगना के सागर दत्त मेडिकल कॉलेज समेत राज्य भर के सभी सरकारी अस्पतालों में शुक्रवार को भी स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य नहीं हुई।
दस बजे के बाद हालात और बिगड़े हैं क्योंकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आईएमए) के निर्देशानुसार चिकित्सकों ने प्रत्येक जिले के मुख्यालय के पास धरना प्रदर्शन और आंदोलन की शुरुआत की है। इमरजेंसी में इलाज करने वाले डॉक्टरों ने भी काला काली पट्टी बांध रखी है ताकि चिकित्सकों पर हमले के खिलाफ सांकेतिक विरोध जता सकें।

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