कोटा के हॉस्टल में लगी आग, 28 विद्यार्थी सुरक्षित निकले.

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शिक्षा नगरी में 4000 से अधिक हॉस्टल व 3000 पीजी रूम में 1 लाख कोचिंग विद्यार्थी रहते हैं, अग्निशमन सुरक्षा के उपाय नाकाफी



कोटा,11 जून (हि.स.)। सूरत में एक कोचिंग संस्थान में आगजनी की घटना से 20 विद्यार्थियों की दर्दनाक मौत के बाद शिक्षा नगरी कोटा में सोमवार रात 10 बजे अचानक एक ब्वायज हॉस्टल में आग लग जाने से कोचिंग विद्यार्थियों में सुरक्षा को लेकर दशहत फैल गई।
शहर में तलवंडी क्षेत्र में राधाकृष्ण मंदिर के पास एक मकान पर बने तीन मंजिला हॉस्टल में लगभग 28  कोचिंग विद्यार्थी रहते हैं। देर रात अचानक भीषण आग की लपटों व धुएं से विद्यार्थियों में दम घुटने से भगदड़ मच गई। चीख-पुकार सुनकर क्षेत्र के नागरिक दौड़ पडे़। आग की लपटें तेज हो जाने से कुछ विद्यार्थी हॉस्टल में ही फंस गए। दमकल की गाड़ियों के पहुंचने के बाद आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। तब तक विद्यार्थियों का धुएं में दम घुटता रहा। डीएसपी संजय शर्मा ने मौके पर पहुंचकर विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। अचानक हुए हादसे की सूचना मिलते ही जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल व एसपी दीपक भार्गव भी मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड के पास रस्सियां नहीं होने से छात्रों को नीचे उतारने में वक्त लगा। मशक्कत के बाद एक-एक विद्यार्थी को रस्सी के सहारे नीचे उतारा गया।
हॉस्टल संचालक हिम्मत सिंह हाड़ा ने बताया कि वे खुद हॉस्टल के नीचे मकान में रहते हैं। हॉस्टल के पास ट्रांसफार्मर होने से शार्ट सर्किंट होने का भय बना रहता था। शिकायत करने के बाद भी केईडीएल कंपनी द्वारा इसे नहीं हटाया गया। आगजनी के समय ट्रांसफार्मर से चिंगारी निकली, जिससे केबल के जरिये आग उनके हॉस्टल तक पहुंची। उधर, केईडीएल अधिकारियों का कहना है कि आग हॉस्टल में अंदर से शार्ट सर्किंट या किसी फाल्ट के कारण लगी है। एसपी दीपक भार्गव ने कहा कि घटना की उच्चस्तरीय जांच की जाएगी एवं दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम द्वारा एनओसी देने पर सवाल
शिक्षा नगरी के कोचिंग क्षेत्रों में तेजी से हॉस्टल्स के निर्माण हो रहे हैं। निर्माण से पहले नगर निगम द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये जाते हैं। लेकिन पिछले 5 वर्षों में जितने भी हॉस्टल के निर्माण किये गये हैं उनमें से 50 प्रतिशत में सेटबैक की कमी, सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी जैसे मामले सामने आए हैं। संबंधित निगम अधिकारियों की मिलीभगत से हॉस्टल संचालकों को भौतिक सत्यापन किये बगैर एनओसी जारी कर दी जाती है। छात्रावासों में एसी व अन्य उपकरणों के कारण बिजली की खपत निर्धारित क्षमता से अधिक रहती है। इससे लाइनों में शार्ट सर्किंट होने का अंदेशा बना रहता है।

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