राजकोष प्रबंधन में फिसड्डी साबित हुई बंगाल सरकार

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  बंगाल के चहुमुखी विकास के दावे करने वाली ममता बनर्जी सरकार राजकोष प्रबंधन के मामले में फिसड्डी साबित हुई है।



कोलकाता, 07 जून (हि.स.)।  बंगाल के चहुमुखी विकास के दावे करने वाली ममता बनर्जी सरकार राजकोष प्रबंधन के मामले में फिसड्डी साबित हुई है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा तैयार किए गए सूचकांक ने राजकोष मैनेजमेंट की दक्षता के मामले में देश भर के 29 राज्यों में से बंगाल को 28 वां स्थान दिया है जो अंतिम सूची से केवल एक पायदान ऊपर है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए हाल ही में जारी हुई कैग की रिपोर्ट ने इस बात का उल्लेख किया था कि पश्चिम बंगाल सरकार ने जीएसटी और अन्य कर संग्रह में शानदार आय अर्जित  की है लेकिन  राजकोष मैनेजमेंट में सरकार  विफल रही है।

उद्योग परिसंघ की ओर से जारी किए गए इंडेक्स में इस बात का उल्लेख किया गया है कि राजकोष की स्थिति के आकलन के लिए केवल राजकोष के घाटे में हुई कमी को आधार नहीं बनाया जा सकता। राज्य सरकार ने अपने दम पर कितनी अधिक आय की है और उस आय का कितना पैसा खर्च कर सकी है, यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। इसके अलावा नए इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में धनराशि खर्च हो रही है या पुराने ढांचे पर ही काम चल रहा है, यह भी देखा जाता है। साथ ही राज्य सरकार पर मौजूदा कर्ज का ब्याज चुकाने में भी कितना पैसा खर्च हो रहा है और उसे किस तरह से प्रबंधित किया जा रहा है यह भी सूचकांक को तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आकलन बिंदु है। इन तमाम पहलुओं की समीक्षा करने पर पश्चिम बंगाल सरकार अंतिम पायदान से केवल एक सीढ़ी ऊपर है। सीआईआई द्वारा तैयार फिजकल परफॉरमेंस इंडेक्स में बताया गया है कि महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा जैसे बड़ी आय वाले राज्य भी इस सूचकांक में आगे नहीं हैं बल्कि इस बार मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य राजकोष प्रबंधन में शानदार प्रदर्शन के साथ आगे आए हैं। शीर्ष पायदान पर बिहार है। सीआईआई की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2004-05 से लेकर 2016-17 तक पश्चिम बंगाल सहित सात राज्यों के राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत से अधिक हो रहा था।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद वित्त वर्ष 2010-11 में बंगाल सरकार का राजकोषीय घाटा 4.24 प्रतिशत था। 2016-17 में घटकर 2.82 प्रतिशत हो गया। इसी समय अंतराल में राजस्व घाटा 3.75 प्रतिशत से घटकर 0.96 प्रतिशत पर आ गया लेकिन सीआईआई का कहना है कि इस आंकड़े पर गौर करने से काम नहीं चलेगा बल्कि राज्य में जीडीपी की तुलना में ब्याज, कर्ज, पेंशन आदि वितरण के बाद राजस्व आय कितना था, यह देखना पड़ता है। इसके अलावा जीडीपी की तुलना में ढांचागत विकास में कितना खर्च हुआ, जीडीपी की तुलना में राज्य के कर से कितना लाभ हुआ और जीडीपी की तुलना में कुल ॠण में कितना कमी आई है।

गत फरवरी महीने में राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार पर अभी 4 लाख 32 हजार करोड़ रुपये ऋण है। इसे घटाने के लिए और अधिक 53 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ा है। इस साल राज्य सरकार को 56 हजार करोड़ रुपये का ऋण चुकाना होगा।


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