गया नगर निगम में करोड़ों रुपये का घोटाला!

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गया नगर निगम एक बार फिर चर्चा में है।सरकार ने गया के  जिलाधिकारी को नियम- कानून को दरकिनार कर सरकारी राशि के दुरुपयोग एवं जालसाजी की जांच  कराने का आदेश दिया है।



 गया, 05 जून (हि.स) गया नगर निगम एक बार फिर चर्चा में है।सरकार ने गया के  जिलाधिकारी को नियम- कानून को दरकिनार कर सरकारी राशि के दुरुपयोग एवं जालसाजी की जांच  कराने का आदेश दिया है।
तीन दशक पूर्व तत्कालीन डीएम सुधीर कुमार की पहल पर नगर निगम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहे आईएएस अधिकारी एसएम राजू सहित कई निगमकर्मियों के खिलाफ गया शहर के सिविल लाइंस थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।आईएएस अधिकारी सह तत्कालीन उप मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद चौधरी उक्त कांड के वादी बने थे।
आईएएस अधिकारी श्री राजू स्वास्थ्य अधिकारी से इंजिनियरिंग और अभियंता से हेल्थ आफिसर का “कार्य” कराकर मीडिया की सुर्खियों में आ गए थे। वहीं, एक बार फिर नगर निगम में इतिहास दोहराया जा रहा हैं।नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। नगर आयुक्त कंचन कपूर तो दूसरी ओर मेयर गणेश पासवान एवं उप मेयर अखौरी ओंकारनाथ श्रीवास्तव उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। दोनों पक्ष एक- दूसरे पर करोड़ों रुपए का बंदरबांट करने का आरोप लगा रहे हैं।
नगर आयुक्त कंचन कपूर ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद को पत्र लिखकर मेयर-उप मेयर पर गंभीर वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाया।
 नगर आयुक्त का कहना हैं कि पालीथीन प्रतिबंध के नाम पर बगैर किसी प्रशासनिक स्वीकृति के 90 लाख 56 हजार रुपए खर्च किया गया। 14वें वित्त आयोग की राशि को डायवर्ट कर भुगतान किया गया है।जबकि विभाग की ओर से मात्र 2 लाख 12 हजार रुपए का आंवटन प्राप्त था।
इसके अलावे कई अन्य मामले में विभागीय निर्देश और नियमावली की अनदेखी कर भुगतान करने का आरोप हैं।
दूसरी ओर मेयर गणेश पासवान,उप मेयर अखौरी ओंकारनाथ श्रीवास्तव उर्फ मोहन श्रीवास्तव एवं सशक्त स्थाई समिति के सदस्यों ने प्रेस कांफ्रेंस कर आयुक्त कंचन कपूर पर नौ करोड़ रुपए का भुगतान बगैर स्थाई समिति और नगर निगम बोर्ड की स्वीकृति के करने का आरोप लगाया है।
साथ ही आयुक्त पर अपने सरकारी आवास के रसोईघर में कार्यालय का एसी लगाने एवं भ्रष्टाचार के आरोपी अभियंता को संरक्षण देने का आरोप है।

 


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