बंगाल में माकपा-कांग्रेस के बीच फिर गठजोड़ की सुगबुगाहट

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लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में भाजपा के शानदार प्रदर्शन तथा कांग्रेस और माकपा को हुए भारी नुकसान को देखते हुए एक बार फिर वाम-कांग्रेस गठबंधन पर चर्चा तेज हो गई है।



कोलकाता, 05 जून (हि.स.)। लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में भाजपा के शानदार प्रदर्शन तथा कांग्रेस और माकपा को हुए भारी नुकसान को देखते हुए एक बार फिर वाम-कांग्रेस गठबंधन पर चर्चा तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों का गठजोड़ होते-होते रह गया था लेकिन आम चुनाव में करारी शिकस्त के बाद  2020 के नगर पालिका चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों पार्टियों के बीच एक बार फिर गठबंधन पर चर्चा तेज हो गई है।
बुधवार को प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और बहरमपुर से सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि किसने क्या किया, यह चर्चा करने का विषय नहीं रह गया है। अब एक बार फिर दोनों ही पार्टियों के नेताओं को बैठकर पहले की गलतियों को नहीं दोहराते हुए तत्काल गठबंधन पर चर्चा कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी भाजपा राज्य को बुरी स्थिति में पहुंचा रही है। चारों तरफ हिंसा, अराजकता, ध्रुवीकरण, सांप्रदायिकता का माहौल बना हुआ है। इसके लिए बंगाल की शांतिप्रिय जनता विकल्प की तलाश में है और कांग्रेस तथा वाम मोर्चा मिलकर यह विकल्प तैयार कर सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि सीताराम येचुरी वरिष्ठ नेता हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका महत्व भी है। उन्हें चाहिए कि दिल्ली जाकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करें। उन्होंने सलाह दी कि दोनों ही पार्टियों के गठबंधन के लिए तत्काल पहल करने की जरूरत है।
दरअसल मंगलवार को माकपा की राज्य इकाई ने हार के कारणों की समीक्षा की थी। इस दौरान  पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी  के सामने राज्य भर से जो रिपोर्ट पेश की गई है उसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा की बदहाली के लिए शीर्ष नेतृत्व जिम्मेवार है, क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल के अत्याचार से कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए शीर्ष नेतृत्व म

ने ना तो कोई पहल की और ना ही किसी तरह से कार्यकर्ताओं का बचाव किया। इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि अगर कांग्रेस के साथ वाममोर्चा का गठबंधन हुआ होता तो स्थिति कुछ और होती।  इसलिए माकपा का शीर्ष नेतृत्व इस बात पर चर्चा करने लगा है कि किस तरह से एक बार फिर राज्य में चुनाव से पहले कांग्रेस से गठबंधन किया जा सके।
बतया जा रहा है कि कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने के लिए सीताराम येचुरी ने कांग्रेस को ही जिम्मेवार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि जिन सीटों पर वाममोर्चा के प्रत्याशियों ने पहले से जीत दर्ज की थी वहां भी कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारने पर तुल गई थी इसीलिए गठबंधन नहीं हो सका। इधर कांग्रेस का कहना है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से सलाह लिए बगैर वाममोर्चा ने उम्मीदवार उतारने की शुरुआत कर दी थी जिसकी वजह से गठबंधन नहीं हो सका था। अब एक बार फिर दोनों ही पार्टियों के  नेताओं ने इसे लेकर चर्चा तेज कर दी है।।

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