सुप्रीम कोर्ट से फॉक्सवैगन को राहत, अगले आदेश तक किसी भी निरोधात्मक कार्रवाई पर रोक

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– डीजल कारों में उत्सर्जन छिपाने वाले उपकरण के इस्तेमाल पर एनजीटी ने लगाया था 500 करोड़ जुर्माना

नई दिल्ली, 06 मई (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट जर्मन कार कंपनी फॉक्सवैगन पर अपनी डीजल कारों में उत्सर्जन छिपाने वाले उपकरण का इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण 500 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने के एनजीटी के आदेश के खिलाफ कंपनी की याचिका पर सुनवाई को तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक फॉक्सवैगन के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है।
सात मार्च को एनजीटी ने फॉक्सवैगन पर 500 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। एनजीटी ने दो महीने में जुर्माने की ये रकम जमा करने का निर्देश दिया था। उसके पहले 17 जनवरी को एनजीटी ने फॉक्सवैगन पर सौ करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। कंपनी पर ये जुर्माना अत्यधिक नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर स्वास्थ्य को हुए नुकसान को लेकर लगाया गया था। एनजीटी ने 18 जनवरी को सौ करोड़ रुपए जमा कर दिया था और एनजीटी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने फॉक्सवैगन को 100 करोड़ रुपये जुर्माना भरने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि एनजीटी द्वारा नियुक्त कमेटी ने फॉक्सवैगन पर गलत सॉफ्टवेटर का इस्तेमाल कर दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ाने को लेकर 171.34 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी । कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फॉक्सवैगन की कारों से साल 2016 में लगभग 48.678 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड को दिल्ली की हवा में घोला।
फॉक्सवैगन ने यह बात स्वीकार की थी कि उसने 11 मिलियन डीजल वाहनों में गलत उपकरण का प्रयोग किया था । कंपनी ने साल 2015 में 3 लाख से ज्यादा वाहनों को वापस ले लिया था, जो भारत के बीएस-4 के मानक की तुलना में लगभग 1.1 से 2.6 गुना तक ज्यादा प्रदूषण उत्सर्जित कर रहे थे।

 


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