पलामू लोकसभा चुनाव :भाजपा और विपक्षी गठबंधन में मुख्य मुकाबला

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मेदिनीनगर, 25 (हि.स.)। पलामू लोकसभा चुनाव इस बार सभी चुनावों से भिन्न नजर आ रहा है। इस बार के चुनाव में खास बात यह है कि भोपूं की आवाज़ें नहीं सुनाई दे रही और पोस्टर गायब नजर आ रहे हैं। पलामूवासी भी सभी राजनीतिक दलों के नेता व कार्यकर्ता की चुप्पी से चुनावी हलचल से महरूम हैं। अब चुनाव रण भूमि में मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी बीड़ी राम और विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी घुरन राम के बीच में है।
विपक्षी गठबंधन में शामिल सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता व कार्यकर्ता भी लगे हुए हैं। बसपा प्रत्याशी अंजना भुईयां भी अपनी उपस्थिति बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इस बार विपक्षी गठबंधन में सबसे दिलचस्प पहलू देखने को यह मिल रहा है की राजद प्रत्याशी के पक्ष में डालटनगंज विस से लगातार जीत का रिकॉर्ड बनाने वाले पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी खुलकर विपक्षी गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में हैं। वहीं पूर्व मंत्री व कांग्रेसी नेता के एन त्रिपाठी भी सघन जनसम्पर्क अभियान में हैं।
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी बीड़ी राम के पक्ष में पार्टी के कुछ समर्पित नेता व कार्यकर्ता लगे हुए है, लेकिन कुछ नेता व कार्यकर्ता नाराज़ चल रहे हैं। उनमें उत्साह नजर नहीं आ रहा है। बेहतर बूथ मैनेजमेंट वाली बीजेपी केकार्यकर्ताओं में कुछेक नेता व कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी बीजेपी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि बीजेपी ने आपने स्टार प्रचारक राजनाथ सिंह की जनसभा हुसैनाबाद विधानसभा में कराई गयी। इस विधानसभा क्षेत्र में दो बार से अधिक राजद का कब्जा रहा है। वर्तमान में यह सीट बसपा के कब्जे में हैं जिसके विधायक शिवपूजन मेहता हैं। छतरपुर विधानसभा में बीजेपी के वर्तमान विधायक है राधा कृष्ण किशोर। वे यहां में पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। इस बार इस विस क्षेत्र में इलाके लोगों में असंतोष व्याप्त है जिसे पाटने की पूरी कोशिश की जा रही है। वर्तमान सांसद बीड़ी राम ने आदर्श गांव के रूप में इसी विधानसभा क्षेत्र के एक गांव किशुनपुर को गोद लेकर करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। विपक्षी गठबंधन के नेता इस विस क्षेत्र में काफी मेहनत करते दिख रहे हैं। डाल्टनगंज विधानसभा क्षेत्र में भी काफी रोचक स्थिति है। यहां से लगातार विधायक का चुनाव जीतने वालों में इंदर सिंह नामधारी रहे हैं। नामधारी जिस पार्टी से टिकट लिया उसी से जीतते चले गए। एक बार कांग्रेस से टिकट लेकर के एन त्रिपाठी भी जीत चुके हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र से विधायक आलोक चौरसिया जेवीएम से जीतकर बीजेपी में शामिल हो गये। उनके पिताजी आलोक चौरसिया राजद से कई बार चुनाव लड़े थे जिसमें दूसरा पोजिशन रहा करता था। आलोक चौरसिया के बीजेपी में आने के बाद उनके समर्थकों में भी संशय की स्थिति बनी हुई है। गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान बीजेपी विधायक सत्येन्द्र तिवारी हैं। वहीं इस विधानसभा से कई बार जीत दर्ज कर चुके गिरिनाथ सिंह के राजद छोड़कर बीजेपी में आ जाने से यहां भी कार्यकर्ताओं में पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक नवजवान संघर्ष पार्टी के भानु प्रताप शाही हैं। इस क्षेत्र से भाकपा माले प्रत्याशी शुषमा मेहता हैं। इनकी भी पकड़ इस क्षेत्र में है। पांकी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायक कांग्रेस के बिट्टू सिंह है। इनके पिताजी स्व विदेश सिंह भी दो बार अधिक बार विधायक रहे हैं। इस क्षेत्र में बीजेपी संघर्ष की स्थिति में है। विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक रामचंद्र चन्द्रवंशी हैं जो वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री ह। इस क्षेत्र से दो से अधिक जीतने वालों में रामचंद्र चन्द्रवंशी व कांग्रेस के वरिष्ट नेता ददई दुबे रहे हैं। इस लोकसभा चुनाव में मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। वैसे भी बीजेपी ने गढ़वा, डालटनगंज व छतरपुर विधानसभा को टारगेट में रखा है।
क्षेत्र में प्रचार का स्वरूप बदला हुआ है। घर-घर जाकर संपर्क व नुक्कड़ सभा पर ही विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 29 मई को इस लोकसभा क्षेत्र के मतददाता क्या निर्णय लेते है ।


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