बस्ती संसदीय सीट पर कांग्रेस की रणनीतिक चालों ने बदले राजनीतिक समीकरण

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बस्ती, 23 अप्रैल (हि.स.)। बस्ती की तीनों संसदीय सीटों पर सियासी मुकाबला रोचक हो गया है। पहले गठबंधन में ये सीटें बसपा के हिस्से में देने के बाद भाजपा और बसपा के उम्मीदवारों के बीच सीधे मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन नामांकन के अंतिम दिनों में कांग्रेस पार्टी की रणनीतिक चालों ने सारे राजनीतिक समीकरणों को उलटफेर कर दिया।
बस्ती, संतकबीर नगर और डुमरियागंज संसदीय सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने दूसरे राजनीतिक दलों के दल बदलू नेताओं को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा के उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें बढ़ाने की कोशिश की। बस्ती संसदीय सीट बसपा के कोटे में जाने के बाद सपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह पार्टी से बगावत कर भाजपा से चुनाव लड़ने की फिराक में थे। लेकिन भाजपा द्वारा हरीश द्विवेदी को उम्मीदवार बनाने के बाद राज किशोर सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। राज किशोर सिंह के कांग्रेस से चुनावी मैदान में उतरने के बाद इस सीट पर अब मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
इसके अलावा जूता कांड के बाद संतकबीर नगर संसदीय सीट पर सपा के दिग्गज नेता और दो बार सांसद रहे भालचंद यादव भाजपा में भविष्य तलाश रहे थे। जबकि भाजपा द्वारा इस सीट पर गोरखपुर से प्रवीण निषाद को देने के बाद उन्होंने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया।
कांग्रेस पार्टी से नामांकन के बाद सातवीं बार इस सीट से चुनाव लड़ने जा रहे भालचंद यादव ने भाजपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद और बसपा उम्मीदवार भीष्म शंकर तिवारी के बाहरी होने का मुद्दा उछाल कर दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी करने का भरपूर प्रयास किया।
इसी तरह डुमरियागंज संसदीय सीट से कांग्रेस पार्टी के तीन दिग्गज नेता दावेदार थे लेकिन पार्टी ने भाजपा के टिकट के दावेदार रहे डॉ. चंद्रेश उपाध्याय को उम्मीदवार बनाया। तीनों संसदीय सीटों पर कांग्रेस पार्टी द्वारा उम्मीदवारों के चयन के लिए सियासी चाल चली गई। इससे प्रतिद्वंदी भाजपा और बसपा के उम्मीदवारों को नई चुनावी रणनीति अपनानी पड़ सकती है।


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