सुपौल में जातीय समीकरण के आगे विकास का मुद्दा गायब

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सुपौल, 19 अप्रैल (हि.स.)। तीसरे चरण में सुपौल संसदीय क्षेत्र के लिए होने वाले चुनाव से पहले प्रत्याशी विकास की बात भूल जातीय समीकरण जुटाने में लग गये हैं। यहां से कांग्रेस की रंजीता रंजन और जदयू के दिलेश्वर कामत मैदान में हैं। सुपौल में बूथों की संख्या 1770 है। नये मतदाता सूची के अनुसार वोटरों की संख्या 16 लाख 80 हजार 616 है। इस लोकसभा के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्र निर्मली में वोटरों की संख्या 2 लाख 81 हजार 210, पीपरा में 2 लाख 74 हजार 437, सुपौल में 2 लाख 74 हजार 336, त्रिवेणगंज में 2 लाख 69 हजार 967, छातापुर में 2 लाख 84 हजार 274 और सिंहेश्वर में वोटरों की संख्‍या 2 लाख 96 हजार 392 है।
यहां यादव वोटरों की संख्या 20.60 प्रतिशत, मुसलमान 16.05 प्रतिशत, ब्राह्मण 4.10 प्रतिशत, राजपूत 2.32 प्रतिशत, कोईरी 3.92 प्रतिशत, मल्लाह 4.31 प्रतिशत, बनिया 2.72 प्रतिशत, धानुक 7.28, कलवार 1.53, तेली 3.26, ततवा 2.24, रविदास 4.09, पासवान 4.88 और मुसहर मतदाताओं की संख्या 6.07 प्रतिशत है।
सुपौल लोकसभा क्षेत्र के तहत निर्मली से जदयू के विधायक अनिरुद्ध यादव (यादव), पीपरा से राजद के यदुवंश यादव (यादव), सुपौल से जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव), त्रिवेणीगंज से जदयू की वीणा भारती (पासवान), छातापुर से भाजपा के नीरज कुमार बबलू (राजपूत) और सिंहेश्वर से जदयू के रमेश ऋषिदेव (मुहसर) विधायक हैं। इस लोकसभा सीट के तहत आने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव और रमेश ऋषिदेव राज्य सरकार में मंत्री हैं।
सुपौल से 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस की रंजीता रंजन और जदयू के दिलेश्वर कामत आमने-सामने थे। इस बार भाजपा के कामेश्वर चौपाल दौड़ से बाहर हो गये हैं। इस चुनाव में जातियों का ध्रुवीकरण ही चुनाव परिणाम को प्रभावित करेगा। हालांकि महागठबंधन के प्रत्याशी रंजीता रंजन को राजद समर्थकों का भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना है कि रूठे समर्थकों को मनाने में रंजीता कहां तक सफल हो पाती हैं।
2014 में किस पार्टी को कितने वोट मिले
रंजीत रंजन (कांग्रेस) 332927 (35 %)
दिलेश्वर कामत ( जदयू) 273255 (29%)
कामेश‍वर चौपाल (भाजपा) 249693 (26%)


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