पांच साल सारदा‌-नारदा पर भांजते रहे तलवार, चुनाव आया तो भूल गये!

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-पश्चिम बंगाल की विडंबना, अरबों रुपये का चिटफंट घोटाला नहीं बन सका मुद्दा
कोलकाता, 13 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में अरबों रुपये के चिटफंड घोटाला ‘सारदा’ और कैमरे पर खुलेआम घूस लेकर एक फर्जी कंपनी को मदद करने का स्टिंग ऑपरेशन ‘नारदा’ पिछले पांच साल तक राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा मुद्दा रहा। राजनीतिक दल इस मुद्दे पर तलवार भांजते रहे। मगर लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा हाशिये पर चला गया। मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी ही नहीं, राज्य में 35 साल तक शासन करने वाली माकपा और कांग्रेस ने भी इन मुद्दों को भुला दिया है।
सारदा चिटफंड घोटाला में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कम से कम 14 लोग फंसे हुए हैं। इसकी आंच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी सचिव तक पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव से पहले की तकरीबन हर जनसभा में इस मुद्दे पर तृणमूल को घेरा है। अब पूरा फोकस घुसपैठ, एनआरसी और गैर मुस्लिम शरणार्थियों के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक है। माकपा और कांग्रेस ने भी अपनी रैलियों में सारदा का जिक्र करने के बजाय भाजपा को निशाना बनाना शुरू किया है।
नारद स्टिंग ऑपरेशन 2015 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आया था। इसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लोगों की भूमिका पर सवाल उठे थे। इस स्टिंग के घेरे में 12 लोग थे। इसमें एक फर्जी कंपनी के निदेशक बनकर नारद न्यूज पोर्टल के सीईओ मैथ्यू सैमुअल ने स्टिंग ऑपरेशन किया था। यह मुद्दा भी लोकसभा चुनाव से गायब है।
यह दोनों मामले 2013 और 2014 के बीच सामने आये थे। तब भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस में थे। पार्टी में उनकी हैसियत दूसरे नंबर पर थी। इन दोनों मामलों में मुख्य आरोपित मूल रूप से उन्हीं को बनाया गया था। इस बारे में प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव राहुल सिन्हा का कहना है कि ये दोनों मुद्दे कभी भी गौण नहीं हुए हैं। इनकी जांच चल रही है। तृणमूल के लोग इसमें फंसे हैं। मुकुल रॉय के बारे में उन्होंने कहा कि भाजपा का कोई भी नेता चिटफंड घोटाले में शामिल नहीं है। भाजपा ने इस मुद्दे को नहीं छोड़ा है।
उन्होंने कहा कि इन दोनों मुद्दों के गौण होने की वजह यह है कि 2016 के विधानसभा चुनाव में इनका खास असर नहीं हुआ। 2018 के पंचायत चुनाव में भी ये मुद्दे लोगों को प्रभावित नहीं कर सके। अल्पसंख्यक घुसपैठ, एनआरसी और बंगाल में रहने वाले गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने संबंधी भाजपा के मुद्दे पर अधिकतर लोग साथ खड़े हुए हैं। इसीलिए ‘सारदा-नारदा’ गौण हो गए हैं।


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