सैफई परिवार के सामने भाजपा उम्मीदवार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा कमल खिलाना

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फिरोजाबाद, 07 अप्रैल (हि.स.)। फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां सैफई परिवार के दो दिग्गज प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव व उनका भतीजा सपा सांसद अक्षय यादव चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। वहीं, भाजपा ने भी अपने पुराने स्थानीय कार्यकर्ता डॉ. चन्द्रसेन जादौन को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है। सैफई परिवार के दो बड़े दिग्गजों के सामने कम समय में कमल खिलाना भाजपा उम्मीदवार के लिये चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में भाजपा के लिये इस सीट पर जीत की राह आसान नहीं होगी।
जनसंघ के समय से जुड़े कार्यकर्ता है जादौन
सिरसागंज के ऊमरी गांव से ताल्लुक रखने वाले भाजपा उम्मीदवार डॉ. चन्द्रसेन जादौन वर्तमान में सिरसागंज के अध्यापक नगर में रहते हैं। वह हैवतपुर रोड पर अपना क्लीनिक चलाते हैं। जादौन जनसंघ के समय से जुड़ेे काफी पुराने भाजपा कार्यकर्ता हैं। वह वर्तमान में सिरसागंज विधानसभा में ब्रज क्षेत्र संयोजक चिकित्सा प्रकोष्ठ के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 1996 में भाजपा ने इन्हें घिरोर विधानसभा से चुनाव से मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें मात्र 28500 मत प्राप्त हुये और वह सपा की उर्मिला यादव से सात हजार मतों से चुनाव हार गए।

1988 के बाद नहीं खिला कमल
फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा आखिरी बार 1998 में चुनाव जीती थी। इसके बाद 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में शुरू हुआ हार का सिलसिला पिछले चुनाव की मोदी लहर में भी नहीं रुका। 2014 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान में प्रदेश सरकार के कबीना मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल दूसरे नंबर पर जरूर रहे, लेकिन वोटों का अंतर एक लाख से अधिक रहा था।

जीत के लिये करना पड़ेगा चुनौतियों का सामना
फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार का सीधा मुकाबला सैफई परिवार के दो बड़े दिग्गजों से हैं। एक तरफ गठबंधन के उम्मीदवार व सपा सांसद अक्षय यादव चुनाव मैदान में हैं। वहीं, दूसरी तरफ प्रसपा मुखिया शिवपाल यादव खुद यहां चुनाव लड़ रहे हैं। फिरोजाबाद सीट पर भाजपा को जीत की तलाश कई सालों से हैं। भाजपा हाईकमान ने 03 अप्रैल को जादौन को उम्मीदवार बनाया था और इस सीट पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार को कमल खिलाने के लिये मात्र 20 दिन का समय मिला है। सैफई परिवार के दो बड़े दिग्गजों के सामने भाजपा उम्मीदवार को दिल्ली तक पहुंचने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।


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