‘गोपालगंज टू रायसीना: माय पॉलिटिकल जर्नी’ पर राजनीति में मचा घमासन

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पटना,05 अप्रैल (हि.स.)। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जेल में रहने के बाद भी अपनी पैठ बिहार की राजनीति में बनाये हुए हैं। ट्वीटर पर सक्रिय रहने वाले लालू प्रसाद इस बार वरिष्ठ पत्रकार नलिन वर्मा की ओर से उनके जीवन पर लिखी गयी पुस्तक ‘गोपालगंज टू रायसीना: माय पॉलिटिकल जर्नी’ को लेकर चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र होने की वजह से इस पुस्तक की चर्चा राजनीतिक गलियारे में जोरों पर है। हालांकि अभी इस पुस्तक का विमोचन नहीं हुआ है।
पुस्तक में लालू ने इस बात का दावा किया है कि नीतीश कुमार बिहार में एनडीए के साथ सरकार बनाने के छह महीने बाद ही महागठबंधन में वापस लौटना चाहते थे। इसके लिए 2017 में नीतीश कुमार ने पांच बार प्रशांत किशोर को संदेश पहुंचाने मेरे पास भेजा। हलांकि प्रशांत किशोर ने लालू के इस दावे को खारिज किया है।
लालू ने लिखा है कि 2015 का चुनाव हमने नीतीश कुमार के साथ मिलकर लड़ा था लेकिन अब उन पर से मेरा विश्वास उठ चुका है। देश में पार्टियां भाजपा के खिलाफ एकजुट हो गईं। ऐसे में अगर मैं प्रशांत का ऑफर स्वीकार करता तो जनता कैसे प्रतिक्रिया देती।
इस मुद्दे पर जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने उल्टे लालू को ही अपने लपेटे में ले लिया है। पुस्तक में लिखे लालू के दावे को फर्जी बताते हुए प्रशांत ने ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है- ”लालू का दावा झूठा है। यह अच्छे दिन देख चुके एक नेता की प्रासंगिक बने रहने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं। जदयू में शामिल होने से पहले लालू से मेरी कई मुलाकातें हुईं। अगर मुझे यह बताने को कहा जाए कि इस दौरान क्या चर्चा हुई तो लालू काफी शर्मिंदा होंगे।”
राजद नेता और लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने पिता का समर्थन करते हुए कहा है कि प्रशांत किशोर उस वक्त कई बार लालू प्रसाद से मिले थे और प्रशांत किशोर बिना किसी मकसद के किसी से नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर सीएम के गुरु हो सकते हैं, हमारे नहीं।
जदयू के पूर्व नेता शरद यादव ने भी इसे सही बताया है। उन्होंने मीडिया के समक्ष शुक्रवार को यह साफ-साफ कहा कि लालू की ओर से किताब में लिखी गयी सभी बातें सच हैं।
नीतीश कुमार का समर्थन करते हुए जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार से समझौता करने वाले नेता नहीं हैं। किसके साथ जाना है, पार्टी तय करती है।

 


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