इंटरनेशनल सोलर समिट (आईएसए) में आई सोलर मामाज्

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नई दिल्ली, 11 मार्च (हि.स.)। इंटरनेशनल सोलर सम्मिट (आईएसए) के संस्थापन सम्मेलन के दौरान सोलर मामाज् (सोलर माएं) ने पूरी दुनिया से आए राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सोलर मामास् पर बने वृत्तचित्र को सभी ने सराहा, जिसमें दुनिया के सुदूर ग्रामीण इलाकों से आई महिलाओं के सोलर तकनीकीज्ञ बनने की कहानी बताई गई है। अफ्रीका के ग्रामीण इलाके और प्रशांत महासागर के एक द्वीप से आई दो सोलर मामास् ने अपनी कहानी भी सभी को सुनाई। इसके बाद सभी सोलर मामास् ने कोरस में ‘हम होंगे कामयाब’ गाकर सोलर एनर्जी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई। सोलर मामास् यानी सौर माएं वो ग्रामीण अशिक्षित महिलाएं हैं, जिन्हें सोलर उपकरणों जैसे सोलर लालटेन, सोलर कूकर सहित तमाम घरेलू सोलर उपकरणों को सुधारने का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जुलाई, 2016 में अफ्रीकी देश तंजानिया की यात्रा के दौरान ऐसी 30 सोलर मामास् से मिले थे। वे सभी सोलर मामास् भारत के राजस्थान के तिलोनिया के बेअरफुट कॉलेज से थीं, जहां उन्हें घरेलू सौर उपकरणों को सुधारने का प्रशिक्षण दिया गया था। भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) के संस्थापन सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत और फ्रांस ने मिलकर दुनिया में सौर ऊर्जा के जरिए ऊर्जा समस्या को कम करने और धरती को और हरित बनाने के प्रयास शुरू किए हैं। आईएसए की शुरुआत पेरिस में 30 नवम्बर, 2015 को यूएन क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई थी।


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