राज नारायण ने जहां अन्याय जुल्म देखा, वहीं तन कर खड़े हो गए

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वाराणसी, 31 दिसम्बर (हि.स.)। प्रसिद्ध समाजवादी नेता राज नारायण को उनकी 25 वीं पुण्यतिथि पर सोमवार को शिद्दत से याद किया गया। इस अवसर पर बेनिया बाग स्थित लोकबंधु राजनारायण उद्यान में आयोजित सभा में जुटे विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी विशाल प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
कार्यक्रम के आयोजक प्रदेश के पूर्व एमएलसी अरविंद सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज नारायण 69 साल की उम्र में 80 बार जेल गए। उन्होंने कुल 17 साल जेल में बिताए। इसमें 3 साल आजादी के पहले और 14 साल आजादी के बाद के रहे। पूर्व एमएलसी ने कहा कि इतने साल तो गांधी जी ने भी जेल में नहीं गुजारे होंगे। राज नारायण ने जहां अन्याय और जुल्म देखा वहीं उसके खिलाफ तन कर खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि राज नारायण ने एक ओर जहां राजनीतिक संघर्ष को धारदार बनाया, वहीं विचार व आचरण से कार्यकर्ताओं की फौज भी खड़ी की।
सभा में अन्य वक्ताओं ने कहा कि आम आदमी के सवालों पर सड़क से संसद तक जूझने वाले अप्रतिम योद्धा राज नारायण ने एक ओर जहां कांग्रेस की सबसे ताकतवर नेता इंदिरा गांधी को कोर्ट और चुनाव दोनों में हराया। वहीं 1977 में जनता पार्टी के शासनकाल में दोहरी सदस्यता के खिलाफ सवाल खड़ा कर आरएसएस के विरोध में मोर्चा खोला। वक्ताओं ने कहा कि इसी बेनियाबाग मैदान में राज नारायण ने सत्याग्रह कर महारानी विक्टोरिया की मूर्ति तोड़ी थी। आज ठीक उसी स्थान पर राज नारायण की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। सभा में राधे मोहन सिंह, हर्षवर्धन सिंह, यशोवर्धन सिंह, पंकज सिंह, अमरीश नारायण सिंह, राकेश पाठक सहित तमाम समाजवादी नेताओं ने विचार रखे।


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