मन की बात : प्रधानमंत्री ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और ओबीसी आयोग को बताया उपलब्धि

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नई दिल्ली, 26 अगस्त (हि.स.) । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हमने दशकों पुरानी मांग को पूरा करते हुए ओबीसी आयोग बनाया है और उसे संवैधानिक दर्जा दिया गया है। इससे गरीब दलितों का उत्पीड़न से बचाव हो सकेगा। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट संशोधन विधेयक को जल्द पारित कराने को भी सरकार की उपलब्धि करार दिया।
प्रधानमंत्री ने रविवार को ‘मन की बात’ के 47वें संस्करण में देशवासियों को रक्षाबंधन और आगामी जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा ज्ञान का भंडार संस्कृत भाषा और उसके साहित्य में है। हम सभी भारतीय इस बात पर गर्व करते हैं कि वैदिककाल से वर्तमान तक संस्कृत भाषा ने ज्ञान के प्रचार-प्रसार में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। श्रावण पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है। मैं उन सभी लोगों का अभिनन्दन करता हूं, जो इस महान धरोहर को सहेजने, संवारने और जनसामान्य तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
संसद के मॉनसून सत्र के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘लोकसभा की प्रॉडक्टिविटी 118 प्रतिशत और राज्यसभा की 74 प्रतिशत रही। लोकसभा ने 21 और राज्यसभा ने 14 विधेयकों को पारित किया। इस सत्र में पिछड़ा और युवाओं को लाभ पहुंचाने के लिए कई विधेयकों को पारित किया गया। दशकों से ओबीसी आयोग की मांग चली आ रही थी। लेकिन, इस सरकार ने आयोग बनाने के साथ ही उसे संवैधानिक दर्जा देने का काम किया है।’
मोदी ने कहा कि इस बार सबसे ज्यादा सुझाव अटल जी के जीवन पर प्रकाश डालने को लेकर मिले। एक ऐसे राष्ट्रनेता जो 10 साल से सक्रिय राजनीति से दूर थे, लेकिन 16 अगस्त के बाद देश व दुनिया ने देखा कि 10 साल की दूरी के बाद भी वह मन से दूर नहीं हुए। जो भावना उनके निधन के बाद लोगों के मन में उमड़ पड़ी, उससे उनका विशाल व्यक्तित्व सामने आया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अटल जी का एक अहम पहलू यह है कि उन्होंने राजनीतिक संस्कृति में बदलाव किया। 91वें संशोधन अधिनियम 2003 के लिए भारत हमेशा उनका ऋणी रहेगा। इससे दलबदल विरोधी कानून के तहत तय सीमा एक तिहाई से बढ़ाकर दो तिहाई कर दी गई। दलबदल पर अयोग्य ठहराने का भी प्रावधान जोड़ा गया। राज्यों की कैबिनेट के संदर्भ में यह तय किया गया कि कुल विधायकों की 15 फीसदी संख्या ही मंत्रिपरिषद में शामिल हो सकती है।’


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