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प्रधानमंत्री 17 फरवरी को बेगूसराय में रखेंगे खाद कारखाना की आधारशिला

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बेगूसराय,11फरवरी(हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी को बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय में फिर से बनने वाले खाद कारखाना की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री बरौनी रिफाइनरी विस्तारीकरण के कुछ योजनाओं की आधारशिला रखने के अलावे गढ़हारा यार्ड में बने अति आधुनिक लोकोशेड का भी उद्घाटन करेगें। रिफाइनरी में बीएस-फोर ग्रेड के उत्पादन कार्य का शुभारंभ किये जाने की भी संभावना है। इस अवसर पर राज्यपाल लालजी टंडन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं राज्यसभा सदस्य प्रो राकेश सिन्हा समेत केंद्र सरकार के कई मंत्री उपस्थित रहेंगे। मौके पर प्रधानमंत्री उलाव हवाई अड्डा परिसर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। जनसभा के लिए उलाव हवाई अड्डा पर प्रशासनिक देखरेख में मंच निर्माण समेत अन्य व्यवस्था शुरू कर दी गई है। बता दें कि बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बिहार केसरी श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल में बरौनी औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुई थी तथा उसी समय यहां खाद कारखाना बना था जिसमें बना मोती यूरिया पूरे देश में प्रसिद्ध हुआ था लेकिन तत्कालीन सरकारों के सिस्टम की कमजोरी के कारण यह खाद कारखाना 1999 में बंद हो गया। इसके बाद कई आंदोलन हुए। डॉ भोला सिंह ने मामले को कई बार उठाया तो 2008 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान ने यहां आकर खाद कारखाना के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया था लेकिन उसका निर्माण नहीं हो सका। बाद में भोला बाबू लगातार इस मामले को उठाते रहे। 2014 के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नजर गई तो उन्होंने इसके पुनर्निर्माण की घोषणा की । इसके बाद 25 मई 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे फिर से बनाने का फैसला लिया। 25 जुलाई 2016 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में वित्तीय पुनर्गठन पैकेज के तहत फर्टिलाइजर का करीब नौ हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ करते हुए पुनरुद्धार को मंजूरी दी गई। एक अगस्त 2018 को केंद्रीय कैबिनेट ने इसके लिए 419.77 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त कर्ज देने की मंजूरी दी। बिहार सरकार द्वारा भी दो सौ बीस करोड़ रुपए का स्टाम्प शुल्क माफ किया गया है। पांच हजार एक सौ करोड़ की लागत से बनने वाला यह खाद कारखाना जनवरी 2021 तक तैयार कर लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मई 2021 से यहां प्रत्येक दिन 3850 हजार टन नीम कोटेड यूरिया (प्रत्येक वर्ष 12.70 लाख एमटी) तथा दो हजार टन अमोनिया का उत्पादन होगा। उस समय के हिंदुस्तान फर्टिलाइजर का नाम बदलकर हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (हर्ल) कर दिया गया है। मुख्य प्लांट का निर्माण टेक्नीप करेगी तथा इसे बनाने का जिम्मा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी), कोल इंडिया, हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचएफसीएल) एवं फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने उठाया है। खाद कारखाना बनने से जहां करीब दो हजार स्थानीय लोगों के अलावा एक हजार अधिकारियों की नियुक्ति होगी वहीं, दस हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। खाद कारखाना के निर्माण में पर्यावरण का भी ख्याल रखा जा रहा है। इसके कारण इसे गैस से चलाया जाएगा। पाइप लाइन बिछाने का काम जोर-शोर से चल रहा है तथा सितंबर तक गैस आपूर्ति शुरु हो जाने की संभावना है। कारखाना में खाद उत्पादन समेत सभी कार्य में भूगर्भीय जल का उपयोग नहीं कर गंगा से एक हजार एक सौ घन मीटर जल लाये जाने की योजना है। चिनार कंपनी द्वारा 42 करोड़ की लागत से डिसमेटलिंग तथा आरएन कंस्ट्रक्शन द्वारा जमीन समतलीकरण एवं स्क्रैप उठाने का कार्य विगत वर्ष ही पूरा किया जा चुका है। खाद कारखाना के साथ पुरानी टाउनशिप में ही आधुनिक टाउनशिप बसाने तथा अन्य निर्माण की योजना पर भी काम शुरू हो चुका है जिस पर करीब एक हजार नौ सौ करोड़ रुपया खर्च होना है। 

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