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जज्बा : दो पढ़ी-लिखी युवतियां स्वीट कॉर्न और मोमो बेचकर दूसरों के लिए बन रहीं मिशाल

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 गुवाहाटी, 07 फरवरी (हि.स.)। गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नद के बीचों-बीच स्थित विश्व के सबसे छोटे नदी दीप उमानंद में हर दिन हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक उमानंद मंदिर का दर्शन करने पहुंचते हैं। ब्रह्मपुत्र नद के किनारे उमानंद घाट तक जाने वाले मार्ग पर दो युवतियां इन दिनों ग्राहकों को बुलाते एवं अपने राज्य के बारे में जानकारी देते हुए देखी जा रही हैं।
ब्रह्मपुत्र नद के किनारे उमानंद घाट किनारे डेजी और सोफी नामक युवतियां स्वीट कॉर्न व मोमो बेचती नजर आती हैं। दोनों युवतियां मामूली नहीं हैं, बल्कि दोनों उच्च शिक्षित हैं। बातचीत के दौरान सोफी ने बताया कि मैं वर्ष 2014 में शिलांग से विज्ञान संकाय में (बीएससी) ग्रेजुएट की डिग्री हासिल करने बाद दिल्ली में नौकरी की तलाश में गई थी। मेट्रो स्टेशन पर सफर करने के दौरान लोगों को स्वीट कॉर्न बेचते देखा, जहां से मैंने सोचा कि भविष्य में अगर मैं कुछ निजी व्यापार करूं तो वह स्वीट कॉर्न से ही शुरू करूंगी।
उसने बताया कि सभी लोगों का सपना बड़ा होता है। मेरा भी सपना है कि आगे चलकर अपना एक होटल या रेस्टोरेंट का कारोबार शुरूकर लोगों को विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन खिलाऊंगी। सोफी ने कहा कि लड़कियों को भी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए। काम कोई भी छोटा-बड़ा नहीं है। किसी भी तरह का काम करने से नहीं शर्म आनी चाहिए। लड़की अगर कोई काम करे तो इससे माता-पिता को काफी साहस मिलती है। मैं और मेरी सहेली प्राइवेट जॉब करती थी लेकिन, उसमें काफी समय देना पड़ता था। नौ से दस घंटे हर रोज काम करना पड़ता था। वेतन भी काफी कम मिलता था| उसकी वजह से हमें गुवाहाटी में रहकर एग्जाम की तैयारी करने में काफी मुश्किल हो रही थी। हम लोगों ने मोमो और स्वीट कॉर्न बेचने का निर्णय लिया। इससे जो समय मिलता है, हम दोनों सहेलियां अपनी पढ़ाई की तैयारी में लगाती हैं।
डेजी भुइंया ने बताया कि मैंने गौहाटी यूनिवर्सिटी से 2017 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है। उमानंद घाट के किनारे हम दोनों सहेलियों ने कुछ दिन पहले ही स्वीट कॉर्न और मोमो का एक छोटा-सा स्टॉल खोला है, जिसमें हम शाकाहारी मोमो बेचते हैं। देश-विदेश से आए पर्यटक हमारे यहां पर स्वीट कॉर्न और मोमो खाते हैं। हम दोनों सहेलियां उमानंद में आने वाले सभी भक्तों का स्वागत करती हैं। साथ ही यहां के बारे में व असम के बारे में भी पर्यटकों को जानकारी देती हैं। हम देसी-विदेशी पर्यटकों से यह भी पूछते हैं कि उन्हें असम कैसा लगा, उनके अनुभव को भी संजोने की कोशिश करती हैं। हम दोनों सहेलियां अपने पैरों पर खड़े होकर नारी शक्ति का संदेश दूसरे शिक्षित युवक-युवतियों को देना चाहती हैं। दोनों ने बताया है कि इस व्यवसाय से गुवाहाटी में रहने पर होने वाले सभी तरह के खर्च को वहन करने में वे सफल हो रही हैं।
दोनों ने कहा कि विदेशों में जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो कुछ न कुछ काम करना शुरू कर देते हैं, लेकिन भारत में लोग माता-पिता या सरकारी नौकरी पर ही ज्यादा निर्भर रहते हैं। दोनों ने कहा कि इस काम से उन्हें किसी भी तरह की कोई शर्म महसूस नहीं होती है। उन्होंने युवाओं से शर्म छोड़कर अपने आपको स्वावलंबी बनने का आह्वान किया। दोनों फिलहाल बैंकिंग, एएसपी, एसएससी आदि परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं।

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