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मोदी की विदेश नीति का एक और नया कदम, जनवरी में होगा प्रथम ‘भारत-मध्य एशिया डॉयलॉग’

नई दिल्ली, 10 जनवरी (हि.स.)। ‘रायसीना डॉयलॉग’ के जरिए पूरी दुनिया में विदेश नीति को लेकर एक कूटनीतिक मंच स्थापित करने के बाद अब भारत सरकार मध्य एशियाई देशों के साथ एक नया मंच शुरू करने जा रही है। विदेश मंत्रालय मध्य एशियाई देशों, किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान के साथ पहला डॉयलॉग शुरू करेगा। पहला भारत-मध्य एशिया डॉयलॉग 12-13 जनवरी के उज्बेकिस्तान के समरकंद में होगा। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज करेंगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि विदेश मंत्रियों के स्तर पर प्रथम ‘भारत-मध्य एशिया डॉयलॉग’ 12-13 जनवरी 2019 को उज्बेकिस्तान के समरकंद में हो रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, उज़्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री अब्दुल अज़ीज कामिलोव के साथ इस संवाद की सह-अध्यक्षता करेंगी। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री इस क्षेत्र में संपर्क मुद्दों के लिए समर्पित सत्र के लिए एक विशेष आमंत्रित के रूप में वार्ता में भाग लेंगे। किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री और कजाकिस्तान के प्रथम उप विदेश मंत्री अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से, भारत और मध्य एशियाई राज्यों ने व्यापक रूप से क्षेत्रों में अपने सहयोग को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में ‘भारत-मध्य एशिया डॉयलॉग’ शुरु करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य व्यापार और विकास क्षेत्र में भारत की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने के तरीके तलाशना शामिल है। इस दौरान अफगानिस्तान की भागीदारी के साथ, संवाद के भागीदार क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक गतिविधि को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए भारत और अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यवहार्य कनेक्टिविटी विकल्पों को विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
‘भारत-मध्य एशिया डॉयलॉग’ की शुरूआत की पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2015 में सभी पांच मध्य एशियाई देशों की यात्रा और अगस्त 2018 में विदेश मंत्री के मध्य एशिया दौरे के बाद, ‘भारत-मध्य एशिया डॉयलॉग’ जैसे मंच को स्थापित करने पर विचार हुआ। इसका उद्देश्य सभी मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक, विकास साझेदारी और सांस्कृतिक सहित, सभी क्षेत्रों में आपसी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना है।

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