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जलमार्ग परिवहन से लॉजिस्टिक्स लागत में 4 प्रतिशत तक की कमी संभव: गडकरी

नई दिल्ली, 10 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को परिवहन भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) की पहली तटीय जलयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कंटेनर कांडला से तूतीकोरिन बंदरगाह वाया मंगलोर और कोचीन पहुंचेगा। यह देश में परिवहन की लागत को घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमे कंटेनर के मूवमेंट का कुछ हिस्सा रेलवे से, कुछ सड़क से, कुछ जहाज से होगा।
इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने याद किया कि कैसे लोग जलमार्ग विकसित करने और गंगा नदी पर मालवाहक जहाज चलाने के उनके सपने पर हंसते थे। उन्होंने कहा कि भारत में जलमार्ग परिवहन क्रांति के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में 4 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है, जो निर्यात को 30 प्रतिशत तक बढ़ाएगा। गडकरी ने कहा कि 26 जनवरी को गंगा पर एयरोबैट्स के पायलट रन के अलावा 11 नदियों को जलमार्ग में बदलने की परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर काम चल रहा है।
गडकरी ने कॉनकोर और अन्य कार्गो ट्रांसपोर्टर्स से व्यापार बढ़ाने के लिए जलमार्ग और तटीय शिपिंग का उपयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में माल के परिवहन के लिए जलमार्ग परिवहन सबसे अच्छा विकल्प होने जा रहा है क्योंकि यह लागत प्रभावी होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी है।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कॉनकोर द्वारा आज से शुरू की गई यह नई सेवा माल ढुलाई के लिए बहुत लाभदायक रहेगी। इससे सस्ते खर्चे में सामान भेजा जा सकेगा तथा रेलवे व रोड पर आज जो भार है उसमें भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि 60 टर्मिनल से शुरू हुए कॉनकोर के आज 81 टर्मिनल हो गए हैं। हमारा लक्ष्य है कि अगले वर्ष तक यह 100 का आंकड़ा पार करे। उन्होंने कहा कि भारत में लॉजिस्टिक कॉस्ट विश्वस्तरीय हो, इसके लिए रोड, रेल और समुद्र के संयुक्त प्रयासों से जब हम प्रयास करेंगे, तो यह लक्ष्य जल्दी ही पूर्ण कर पायेंगे, और इससे आगे का विकास तय होगा।
गोयल ने कहा कि भारतीय रेल ने पिछले साढ़े चार सालों में कई नए सुधार किए हैं। सुधारों की शृंखला में यह एक और नई पहल है। उदाहरण के लिए हमने पुराने कोचों को बदलने के लिए केवल एलएचबी कोचों का उत्पादन शुरू किया है। हमने विशाल भारतीय रेलवे नेटवर्क पर सौ प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा है। विद्युतीकरण में भारतीय रेल विश्व की पहली रेल होगी, जो शत-प्रतिशत बिजली से चलेगी, जिसका पर्यावरण पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा। सड़क और रेल मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से हाल ही में बोगीबील पुल का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों हुआ है। रेल युनिवर्सिटी की कल्पना कई वर्षों से देश के समक्ष थी, जिसे अब शुरू कर दिया गया है, वहां 100 से अधिक छात्र ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिये तैयार हो रहे हैं। मेक इन इंडिया पहल के तहत नई स्वदेश निर्मित ट्रेन-18 को जल्द ही नई दिल्ली वाराणसी मार्ग पर रवाना किया जाएगा। पूरे देश में हाईवे का नेटवर्क, सागरमाला द्वारा समुद्री मार्ग, तथा बनारस से भी कंटेनर भेजने के लिये जलमार्ग खुल गया है।

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