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लोकसभा चुनाव प्रचार में प्रदेश भाजपा के लिए तुरुप का इक्का होगा नागरिकता विधेयक

कोलकाता, 10 जनवरी (हि.स.)। आजादी के बाद से ही पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान जैसे सीमावर्ती देशों से भागकर शरण लेने के लिए भारत पहुंचे हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन और अन्य गैर ईसाई तथा गैर मुस्लिम समुदाय के लोगों को नागरिकता देने संबंधी विधेयक को केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकसभा से पारित करा लिया है। मंगलवार को बहुमत के साथ यह बिल पारित हुआ जबकि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने पार्टी का पक्ष रखते हुए इस बिल का न सिर्फ विरोध किया बल्कि से देश की जनसंख्या व्यवस्था को बिगाड़ने वाला बताया है। भाजपा ने इस नागरिक विधेयक को लोकसभा चुनाव 2019 में पश्चिम बंगाल में मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई है। प्रदेश भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से गुरुवार को बताया गया है कि राज्य में करीब एक करोड़ से ज्यादा ऐसे शरणार्थी हैं जो आजादी के बाद से ही स्थाई नागरिकता के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसमें मतुआ संप्रदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं। लोकसभा की 10 और विधानसभा की कम से कम 40 सीटों पर इस समुदाय के लोग निर्णायक भूमिका में हैं। भले ही वर्तमान में मतुआ संप्रदाय के अध्यक्ष तृणमूल सांसद ममता बाला ठाकुर हैं लेकिन प्रदेश भाजपा सूत्रों के हवाले से खबर है कि समुदाय के कई शीर्ष नेता भाजपा के संपर्क में हैं और मौका मिलते ही पाला बदल सकते हैं।‌ अब जबकि केंद्र सरकार ने नागरिकता विधेयक को पारित किया है तो इसे लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में जोर-शोर से प्रचार-प्रसार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस सांसद की ओर से लोकसभा में इसका विरोध करने को भी भाजपा जमकर भुनाने में जुटी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस ने संसद में नागरिकता विधेयक का विरोध किया है उससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश और अन्य प्रांतों से पश्चिम बंगाल में आकर रह रहे हिंदू शरणार्थियों को तृणमूल कांग्रेस रहने नहीं देना चाहती जबकि बांग्लादेशी घुसपैठियों को बुला-बुला कर नागरिकता संबंधी दस्तावेज देती है।
प्रदेश भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि लोकसभा चुनाव से ऐन पहले इस विधेयक का पारित होना पश्चिम बंगाल में भाजपा के पक्ष में है। केंद्र सरकार ने भी इसे बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार करने की जिम्मेवारी पार्टी के प्रदेश इकाइयों को दी है। माना जा रहा है कि इसका लाभ आने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में पार्टी को हो सकता है। 

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