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अब आयकर में छूट बढ़ाकर किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये समर्थन मूल्य का छक्का मार सकती है सरकार

नई दिल्ली,10 जनवरी (हि.स.)। भाजपानीत केन्द्र सरकार ने 09 जनवरी 2019 को आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण जातियों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधित विधेयक दोनों सदनों में पास कराकर कानून बना देने वाला तथाकथित छक्का मारने के बाद अब 01 फरवरी 2019 को पेश होने वाले बजट में जनता को आयकर में जबरदस्त छूट देने वाला छक्का मार सकती है। सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार आयकर की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 05 लाख रुपये कर सकती है। इस बारे में बी.एच.यू. छात्र संघ के अध्यक्ष रहे पूर्व सांसद हरिकेश बहादुर का कहना है कि जब चुनावी युद्ध में कांटे की लड़ाई की संभावना बन जाती है तब जीतने के लिए सत्ताधारी पार्टी अंतिम शस्त्र के तौर पर तरह-तरह के ब्रह्मास्त्र छोड़ने लगती है। भाजपानीत केन्द्र सरकार भी वही कर रही है। इसने अभी नाराज सवर्णों को पटाने के लिए उन्हें आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का बिल संसद के दोनों सदनों में पास कराकर कानून बनाया है। इसके बाद अंतरिम बजट में आयकर सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर सकती है। लेकिन इसके लिए अंतरिम बजट में इस तरह के बड़े निर्णय नहीं करने की परंपरा तोड़नी पड़ेगी। क्योंकि, इसका सीधा असर लोकसभा चुनाव में मतदाताओं पर पड़ता है। आरोप लगता है कि सत्ताधारी पार्टी ने मतदाताओं को लुभाने, पटाने, अपने पक्ष में करने के लिए चुनाव के एक-दो माह पहले यह चाल चली है।
इस पर बी.एच.यू. प्रबंध संकाय के डीन रहे प्रो. छोटेलाल का कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी के राज में 2004 के बजट में तबके वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने परंपरा को तोड़ा था। वर्तमान भाजपानीत सरकार ने भी बीते चार वर्ष आठ माह में लगातार तमाम परंपरायें तोड़ी हैं| सो वह आगामी बजट में आयकर सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दे तो कोई बड़ी बात नहीं है। संबंधित विभागों, मंत्रालय में ऐसा किये जाने की संभावना वाली चर्चा भी है। कई वर्ष से जनता भी यह मांग कर रही है। बढ़ती मंहगाई के चलते यह होना भी चाहिए। वैसे तो अभी भी ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत कोई 4 लाख 50 हजार रुपये सालाना आमदनी पर टैक्स नहीं दे सकता है। इसके लिए उसको विभिन्न योजनाओं में 02 लाख रुपये जमा करनी पड़ती है, जिसमें लाकिंग पीरियड होती है| जमाकर्ता कई वर्ष तक अपनी रकम नहीं निकाल सकता है। निकालेगा तो दिया गया टैक्स लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन लोग अब सीधे पांच लाख रुपये आमदनी पर कोई टैक्स नहीं देना चाहते हैं। इसके लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं में अपनी कमाई की रकम नहीं जमा करना चाहते हैं। महंगाई और खर्चे बढ़ने के कारण लोग परेशान हो गये हैं। यदि सरकार ने आयकर की सीमा नहीं बढ़ाई, तो लोग इस सरकार से खुश नहीं होंगे। कई वर्ष से आयकर सीमा बढ़ाने की मांग हो रही है। लेकिन सरकार जनता की कमाई पर भारी टैक्स लगा अपना खजाना भरने की योजना के तहत इसे टालती रही है। अपनी तमाम खर्चीली प्रचारवाली योजनाओं पर लगाम नहीं लगा रही है, चाहे वे ऊंची मूर्तियां बनवाने का हो या इसी तरह की कई अन्य योजनाएं व कार्य।
पूर्व कृषि राज्य मंत्री सोमपाल शास्त्री का कहना है कि केन्द्र सरकार उद्योगपतियों, नौकरीपेशा लोगों को लाभ देने की तमाम तरकीब ईजाद करती रहती है। जब सीमांत व गरीब किसानों को लाभ देने की बात आती है, उनके उत्पादों का बाजार मूल्य देने की बात आती है,तो उसको, उसके कीर्तनी नौकरशाहों ,कारकूनों को इससे अर्थव्यवस्था धराशायी होने, सरकार का खजाना खाली होने भय होने लगता है। यह सरकार भी यही कर रही है। दिसम्बर 2018 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान विधानसभा चुनाव हारने के बाद इसके हुक्मरानों को किसान याद आने लगे हैं। यदि इस झटके से सबक सीख कर गरीब व सीमांत किसानों को प्रति एकड़ सालाना 20 से 22 हजार रुपये भी देने की व्यवस्था कर दी जाए ,तो भी अच्छा रहेगा। इसके बारे में भाजपा किसान मोर्चा के एक पदाधिकारी का कहना है कि केन्द्र सरकार सीमांत व गरीब किसानों के लिए प्रति एकड़ सालाना 10 हजार रुपये के लगभग देने की घोषणा कर सकती है। इस तरह आगामी लोकसभा चुनाव जीतने के लिए केन्द्र की भाजपानीत सरकार एक के बाद एक ब्रह्मास्त्र छोड़ सकती है।

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