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शिकवे शिकायत के साथ विपक्षी दलों ने भी किया गरीबों को आरक्षण दिए जाने संबंधी विधेयक का समर्थन

नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों को आरक्षण देने सम्बन्धी संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान अधिकतर विपक्षी दलों ने शिकवे शिकायत के साथ इसका समर्थन किया।
विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि नरेंद्र मोदी सरकार इस विधेयक को राजनीतिक लाभ अर्जित करने के लिए लाई है जबकि उसके कार्यकाल के कुछ महीने ही बाकी बचे हैं। उनका कहना था कि यह भी निश्चित नहीं है कि यह आरक्षण कानून की कसौटी पर खरा उतरेगा। विपक्ष ने इसे चुनाव के मद्देनजर एक और जुमला बताया।
कांग्रेस के केवी थॉमस का कहना था कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार यह विधेयक जल्दबाजी में लाया गया है। सरकार ने कोई होमवर्क नहीं किया है और विधेयक में बहुत सी कानूनी खामियां हैं। संविधान संशोधन विधेयक को आधे राज्यों की विधानसभाओं को पुष्टि करनी है। अगले तीन महीनों में ऐसा करना संभव नहीं होगा।
अन्ना द्रमुक थम्बी दुरई ने आरक्षण की अधिकतम सीमा को बढ़ा कर 70 प्रतिशत करने के लिए संविधान संशोधन किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना है कि प्रस्तावित आरक्षण व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट गैर कानूनी घोषित कर दे।
चर्चा में बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले, कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा, आम आदमी पार्टी के भगवंत मान ,समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, राष्ट्रीय जनता दल के जयप्रकाश यादव, शिवसेना के आनंदराव अडसुले, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय, एमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, भाजपा के हुकुमदेव नारायण यादव ,निशिकांत दुबे और महेन्द्रनाथ पांडेय आदि ने भी चर्चा में भाग लिया।
मोदी सरकार में घटक दलों के मंत्रियों अनुप्रिया पटेल और रिपब्लिकन पार्टी के रामदास अठावले ने विधेयक का समर्थन किया। 

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