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निकट दृष्टि दोष की बीमारी से बचाने में धूप और हरियाली मददगार

Noनई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। विकसित देशों में पैठ बना चुकी निकट दृष्टि दोष की बीमारी भारत में भी तेजी से बढ़ रही है। इसके होेने से दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं। चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘मायोपिया’ कहते हैं। हालांकि यह समस्या कुछ हद तक आनुवांशिक है। इसके बावजूद कुछ सा‍वधानी बरत कर इससे बचा जा सकता है।
मौजूदा दौर में मोबाइल, कम्प्यूटर, टेलीविजन अधिक देखने के कारण आंखों की इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है। आप समय रहते सचेत हो जाएं, अपने बच्चे को धूप में देर तक खेलने दें और हरे भरे पेड़ पौधों और घास के समीप उनको वक्त गुजारने दें तो इस प्रकार के नेत्र विकार से उसे बचने में काफी मदद मिलेगी। दूसरे शब्दों में कहें तो प्रकृति के नजदीक रहने और प्राकृतिक हरियाली को भरपूर नजरों से देखने से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। ऐसा करने से आंखों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है।
फोर्टिस हॉस्पिटल की नेत्र रोग विशेषज्ञ शिबल भारतीय ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में बताया कि मायोपिया आमतौर पर बचपन में शुरू होता है। यह बीमारी आनुवांशिक भी होती है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे के माता-पिता को मायोपिया है तो उनके बच्चों को भी यह बीमारी प्राय: हो जाती है। उन्होंने कहा कि अगर समय पर देखभाल नहीं किया गया तो यह उम्र के साथ बढ़ती रहती है।
डॉक्टर शिबल के अनुसार इस बीमारी में दूर की वस्तुएं धुंधली दिखने लगती हैं। इसके कारण आंखों पर जोर देना पड़ता है, जिससे मरीज को तनाव होता है और इस केस में सिर दर्द भी होने लगता है। डॉक्टर ने कहा कि जापान में हुए शोध में यह सामने आया है कि जो बच्चे पास के काम जैसे कम्प्यूटर पर देर तक काम करना, टीवी देखना, मोबाइल देखना, वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों में यह बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। लगातार पास का काम करने से आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं व दूर देखने की क्षमता धीरे-धीर कम होती जाती है, जिसको मायोपिया कहते हैं।
डॉक्टर शिबल ने बताया कि शोध में यह सामने आया है कि जो बच्चे धूप में देर तक खेलते हैं या हरी भरी जगहों में रहते हैं, उनको यह बीमारी कम होती है। उनकी आंखों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है। कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने मायोपिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्कूलों में बच्चों को बाहर धूप में घूमना और खेलना हर दिन के लिए अनिवार्य कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि मायोपिया से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि अभिभावक व टीचर बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान रखें। अगर उनको लगे की बच्चे को देखने में किसी तरह की दिक्कत हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
उल्लेखनीय है कि निकट दृष्टि दोष की समस्या अमेरिका में ही नहीं, अब तो भारत में भी फैल रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में इन दिनों निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। नेशनल आई इंस्टीट्यूट के मुताबिक अमेरिका में 42 फीसदी लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली एम्स ने भी पिछले वर्ष एक अध्ययन कराया था। इस अध्ययन में भारत में मायोपिया के बढ़ने की पुष्टि हुई थी। संयुक्त राष्ट्र ने भी निकट दृष्टि दोष को लेकर दुनिया को चेताया है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अगर इस समस्या से वक्त रहते निपटा नहीं गया तो यह वर्ष 2050 तक विकराल रूप ले सकती है।

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