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इसरो के सबसे वजनी उपग्रह जीसैट-11 का सफल प्रक्षेपण, ब्राडबैंड इंटरनेट सेवा को बनायेगा तेज

नई दिल्ली, 05 दिसम्बर (हि.स.)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अब तक के सबसे भारी आधुनिकतम संचार उपग्रह जीएसएटी-11 का फ्रेंच गुयाना से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया है। पिछले 21 दिनों में इसरो ने सफलतापूर्वक तीन उपग्रह और दो लॉन्च मिशन पूरे किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा और मेनका गांधी ने इसके लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है|
जीसैट को लॉन्च व्हीकल एरियान 5 वीए -246 को फ्रेंच गुयाना के कोरू लॉन्च बेस से भारतीय समयानुसार आज तड़के 2:07 बजे दक्षिण कोरिया के जीईओ-कॉम्पसैट -2ए उपग्रह को निर्धारित समय से लांच किया गया। एरियान-5 सोयाज़ और वेगा के साथ एरियानेस स्पेस द्वारा संचालित तीन लॉन्च व्हीकल में से एक है।
प्रक्षेपित 5854 किलोग्राम वजनी जीएसएटी -11 के क्यू-बैंड में 32 उपयोगकर्ता बीम और का-बैंड में 8 हब बीम के माध्यम से भारत में संचार सेवा उपयोगकर्ताओं को उच्च डेटा दर की कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। 30 मिनट की उड़ान के बाद जीएसएटी -11 एक अंडाकार भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में पहुंचकर एरियान-5 से अलग हो गया। यह तय कक्षा से काफी करीब थी।
प्रक्षेपण के बाद इसरो के चेयरमैन डॉ. के शिवन ने कहा, ‘‘जीएसएटी -11 डीजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत भारत नेट परियोजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण और ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा।’’ भारत नेट प्रोजेक्ट का लक्ष्य ई-बैंकिंग, ई-हेल्थ, ई-गवर्नेंस जैसे सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जीएसएटी-11 सभी भावी उच्च थ्रूपुट संचार उपग्रहों के नेतृत्व के रूप में कार्य करेगा। डॉ शिवन ने कहा कि आज के सफल मिशन ने पूरी टीम के आत्मविश्वास को बढ़ा दिया है।
इसरो की विज्ञप्ति के अनुसार कर्नाटक के हसन में उसके मास्टर कंट्रोल केन्द्र ने लांच व्हीकल से अलग होने के बाद जीएसएटी -11 का नियंत्रण संभाला लिया और सभी मानक सामान्य तौर पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिक चरणबद्ध तरीके से उपग्रह को तय कक्षा में पहुंचाने का प्रयास करेंगे। अपने ऑन-बोर्ड प्रोपल्सन सिस्टम का उपयोग करते हुए भूगर्भीय कक्षा (भूमध्य रेखा से 36,000 किमी) में सैटेलाइट रखने के लिए आगे के दिनों में काम किया जाएगा। जीएसएटी -11 भू- भूगर्भीय कक्षा में 74 डिग्री पूर्व देशांतर पर रहेगा।
इसके बाद जीएसएटी -11 के दो सौर सरणी और चार एंटीना परावर्तक कक्षा में तैनात किए जाएंगे। इन परीक्षणों के सफल होने के बाद उपग्रह काम करना शुरू करेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सबसे भारी और बड़े उपग्रह जीसेट-11 के सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किए जाने पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि जीसेट-11 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर है जो दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़कर करोड़ों भारतीयों के जीवन को बदल देगा।
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसरो द्वारा बुधवार को जीसैट-11 सेटेलाइट के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई दी है। मेनका गांधी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर ट्वीट कर कहा कि हम सभी इस बड़ी उपलब्धि के लिए उत्साहित और गौरवान्वित हैं। जीएटी-11 उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण करने के लिए और इसरो बधाई।
केन्द्रीय संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट ट्वीटर पर ट्वीट कर कहा, ‘हमारे वैज्ञानिक हमें आश्चर्यचकित करने और उन पर गर्व कराने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। जीएटी-11 उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण करने के बाद इसरो को एक और बड़ी उपलब्धि के लिए बधाई। भारत का सबसे भारी सबसे बड़ा सबसे उन्नत उपग्रह है।
इसके अलावा राजस्थान प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बधाई दी है।

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